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हाथी का क्रिकेट बैट: गोलू और जंगल का अनोखा मैच - हिंदी कहानी
हाथी का क्रिकेट बैट: भारत के मध्य में एक बहुत ही हरा-भरा और खुशहाल जंगल था, जिसका नाम था 'चंपकवन'। इस जंगल के जानवर बहुत ही आधुनिक और खेल-कूद के शौकीन थे। वहां शेर, चीता, भालू और बंदर सब मिल-जुलकर रहते थे। लेकिन उन सबका सबसे पसंदीदा खेल था - क्रिकेट (Cricket)।
हर रविवार को चंपकवन के बड़े मैदान में एक जोरदार मैच होता था। जानवरों ने अपनी टीमें बना रखी थीं। लेकिन इस खेल में एक जानवर ऐसा था जो बहुत दुखी रहता था। वह था 'गोलू', एक नन्हा लेकिन भारी-भरकम हाथी। गोलू को क्रिकेट खेलने का बहुत शौक था, लेकिन उसके साथ एक बड़ी समस्या थी।
गोलू की समस्या और टूटा हुआ बैट
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गोलू जब भी बल्लेबाजी (Batting) करने आता, तो उसके भारी शरीर और ताकत के सामने जंगल के साधारण लकड़ी के बैट टिक नहीं पाते थे। जैसे ही वह जोश में आकर शॉट मारता, बैट के दो टुकड़े हो जाते। "अरे यार! फिर से टूट गया," गोलू हर बार यही कहकर उदास हो जाता।
बाकी जानवर उसका मज़ाक तो नहीं उड़ाते थे, लेकिन वे परेशान ज़रूर थे। बंदर 'मोंटी', जो टीम का कप्तान था, ने कहा, "गोलू भाई, हमारे पास अब और बैट नहीं बचे हैं। तुम सिर्फ फील्डिंग (Fielding) कर लिया करो।" गोलू का दिल टूट गया। उसे तो चौके-छक्के लगाने थे। वह मैदान के एक कोने में जाकर बैठ गया। उसकी आँखों में आँसू थे।
गोलू को उदास देखकर उसका सबसे पक्का दोस्त, 'चीकू खरगोश', उसके पास आया। चीकू बहुत ही होशियार और जुगाड़ू था। चीकू ने कहा, "गोलू, तुम उदास मत हो। अगर साधारण बैट तुम्हारे काम नहीं आ रहे, तो क्या हुआ? हम तुम्हारे लिए एक खास हाथी का क्रिकेट बैट बनाएंगे!"
खास बैट की तैयारी
चीकू खरगोश और गोलू जंगल के बढ़ई (Carpenter) 'कालू लकड़बग्घे' के पास गए। चीकू ने कालू को अपनी योजना बताई। "कालू काका, हमें शीशम की सबसे मजबूत लकड़ी से एक ऐसा बैट बनवाना है जो गोलू की ताकत झेल सके। वह बैट थोड़ा भारी और चौड़ा होना चाहिए, बिल्कुल 'मुगदर' जैसा!"
कालू ने सिर हिलाया और काम पर लग गया। दो दिन की मेहनत के बाद, उसने एक विशाल और बेहद मजबूत बैट तैयार किया। यह आम क्रिकेट बैट से तीन गुना बड़ा और भारी था। इसे उठाने की ताकत सिर्फ गोलू में ही थी। गोलू ने जब उस बैट को अपनी सूंड से पकड़ा और हवा में घुमाया, तो सन्न-सन्न की आवाज़ आई। गोलू का चेहरा खुशी से खिल उठा। यह दोस्ती और सूझबूझ का कमाल था।
मैच का दिन: शेरों की टीम बनाम गोलू की टीम
अगले रविवार, चंपकवन प्रीमियर लीग (CPL) का फाइनल मैच था। मुकाबला था 'शेरू लायंस' (शेरों की टीम) और 'बिंदास बंदर' (गोलू की टीम) के बीच। शेरू लायंस की टीम बहुत मजबूत थी। उनकी गेंदबाजी बहुत खतरनाक थी। 'राका भेड़िया' अपनी तेज़ गेंदों से सबको आउट कर रहा था।
मैच बहुत रोमांचक मोड़ पर पहुँच गया। आखिरी ओवर में गोलू की टीम को जीतने के लिए 20 रनों की ज़रूरत थी और उनका सिर्फ एक विकेट बचा था। अब मैदान पर उतरा - गोलू हाथी, अपने नए 'सुपर हैवी बैट' के साथ। शेरू लायंस के खिलाड़ी गोलू के हाथ में (सूंड में) इतना बड़ा बैट देखकर हँसने लगे। "अरे देखो! यह बैट लाया है या कपड़े धोने की थापी?" एक गीदड़ ने मज़ाक उड़ाया।
गोलू का धमाका
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राका भेड़िया ने पहली गेंद फेंकी। गोलू ने अपने भारी बैट को पूरी ताकत से घुमाया। धड़ाम! गेंद बैट से टकराते ही रॉकेट बन गई और जंगल के सबसे ऊंचे ताड़ के पेड़ के भी ऊपर से निकल गई। यह एक विशाल छक्का था! मैदान में सन्नाटा छा गया। किसी ने हाथी को ऐसे शॉट मारते नहीं देखा था।
अगली दो गेंदों पर गोलू ने बैट घुमाया लेकिन गेंद मिस हो गई। अब 3 गेंदों पर 14 रन चाहिए थे। दबाव बहुत ज्यादा था। यह साहस दिखाने का वक्त था। गोलू ने गहरी सांस ली। उसने चीकू की तरफ देखा जो उसे चीयर कर रहा था।
चौथी गेंद पर गोलू ने फिर से प्रहार किया - चार रन! पांचवीं गेंद पर - एक और गगनचुंबी छक्का! अब आखिरी गेंद पर जीतने के लिए 4 रनों की ज़रूरत थी। राका भेड़िया घबरा गया था। उसने एक यॉर्कर (Yorker) गेंद फेंकी। गोलू ने चतुराई दिखाई और अपने 'हाथी का क्रिकेट बैट' से गेंद को धीरे से फ्लिक किया। बैट की ताकत इतनी थी कि हल्का सा टच होते ही गेंद गोली की रफ्तार से बाउंड्री के पार चली गई।
जीत का जश्न
गोलू की टीम मैच जीत गई! सभी जानवर दौड़कर मैदान में आए और गोलू को (जितना उठा सकते थे) उठाने की कोशिश करने लगे। गोलू ने अपना स्पेशल बैट हवा में लहराया। शेरू लायंस के कप्तान ने भी आकर गोलू से हाथ मिलाया और कहा, "मान गए गोलू भाई! तुम्हारे इस बैट और तुम्हारी ताकत का कोई मुकाबला नहीं।"
उस दिन के बाद से, गोलू का वह बैट जंगल में मशहूर हो गया। अब कोई उसे टीम से बाहर नहीं रखता था। गोलू ने साबित कर दिया कि अगर हमारे पास सही उपकरण (Tools) और हौसला हो, तो हम अपनी कमजोरी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना सकते हैं।
बच्चों, हिंदी कहानियां हमें यही सिखाती हैं कि हर किसी के अंदर एक खास टैलेंट होता है, बस उसे पहचानने की देर है।
इस कहानी से सीख (Moral of the Story):
अपनी ताकत पहचानें: दूसरों की नक़ल करने के बजाय अपनी खुद की शैली (Style) और ताकत पर भरोसा करें।
समस्या का समाधान: रोने से कुछ नहीं होता, दिमाग लगाकर समस्या का हल निकालना चाहिए (जैसे चीकू ने बैट बनवाया)।
खेल भावना: खेल में हार-जीत से ज्यादा ज़रूरी मज़ा और टीम वर्क है।
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